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Thursday, July 9, 2020

प्रशिक्षण के माध्यम से श्रमिकों को समृद्ध बनाने की कोशिष

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत हो रहा आयोजन 
श्रमिकों को रोजगार प्रदान करने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा 

बांदा, के0 एस0 दुबे । परदेश से लौटे श्रमिकों को कृषि से संबंधित आय अर्जन के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार योजना के तहत प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित इस प्रशिक्षण में किसानों को प्रशिक्षण के माध्यम से तमाम जानकारियां दी जा रही हैं, इससे वह अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं। यह प्रशिक्षण लगातार 16 सप्ताह तक दिया जाएगा। 
बुधवार को प्रशिक्षण में श्रमिकों को फल एवं सब्जियों के प्रसंस्करण द्वारा उद्यमिता विकास विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारम्भ कृषि विज्ञान केन्द्र में किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ कुलपति डा. यूएस गौतम ने किया। सह निदेशक प्रसार, बीयूएटी, उप कृषि निदेशक, जिला उद्यान अधिकारी, प्रभारी, सब्जी एवं फल परिरक्षण केन्द्र, बाँदा एवं कृषि विज्ञान केन्द्र तथा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के कर्मचारीगण आदि उपस्थित रहे। इस प्रशिक्षण में 40 महिला प्रशिक्षणार्थियों द्वारा प्रतिभाग किया गया। कृषि विज्ञान केन्द्र के अध्यक्ष डा. श्याम सिंह ने आगामी प्रशिक्षण की रूप रेखा प्रशिक्षणार्थियों को विस्तृत रूप से बतायी। उप कृषि निदेशक एके सिंह ने कृषि विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दी। इसके पश्चात जिला उद्यान अधिकारी ने भी उद्यान विभाग की योजनाओं के बारे में बताया। डा. नरेन्द्र सिंह ने कहा कि जहां समस्या होती है वहां समाधान भी होता है। यह महामारी अपने साथ कुछ समाधान लेकर भी आयी है। इस तीन दिवसीय रोजगार परक प्रशिक्षण से महिलाएं जरूर लाभान्वित होंगी, जरूरत है तो बस इच्छा शक्ति जगाने की जो हमारे कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक आप में जगायेंगे। 
प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते कुलपति यूएस गौतम 
कुलपति श्री गौतम ने कहा कि इस करोना काल में कई श्रमिक बेरोजगार हो गये है और ऐसे प्रवासी श्रमिकों के उत्थान एवं उन्हें ग्राम में ही रोजगार प्रदान करने हेतु भारत सरकार द्वारा चलाया जा रहा है। यह अभियान एक सराहनीय पहल है जिससे प्रवासी श्रमिक जरूर ही लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि महिलाओं को स्वावलम्बी बनना होगा और स्वयं सहायता समूह से जुड़कर मशरूम उत्पादन मधुमक्खी पालन, बकरी पालन एवं जैविक खेती जैसे क्षेत्रों में कुछ अलग करके अपनी पहचान बना सकते है। उन्होंने बुन्देलखण्ड के स्वर्णिम इतिहास की भी चर्चा की जब इस क्षेत्र को धान एवं दलहन का कटोरा कहा जाता था और कृषक पलायन नही करते थे, लेकिन आज की तारीख में बुन्देलखण्ड क्षेत्र में कृषकों का पलायन एक विकट समस्या है। अब जब करोना महामारी के कारण सभी अपने-अपने गांव लौट रहे हैं ऐसे समय में कृषि एवं कृषि उद्यमिता ही ऐसा मार्ग है जिससे उन्हें रोजगार प्रदान किया जा सकता है। डा. मानवेन्द्र सिंह ने सभी सम्मानित अथितिगण, प्रशिक्षणार्थियों विभिन्न विभागों से आये हुये अधिकारी एवं कर्मचारी कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डा0 सुभाष चन्द्र सिंह द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में केन्द्र के वैज्ञानिक डा0 सुभाष चन्द्र सिंह, डा0 प्रज्ञा ओझा, डा0 मंजुल पाण्डे, डा0 मानवेन्द्र सिंह, डा0 दीक्षा पटेल, श्री घनश्याम यादव का विशेष योगदान रहा। 

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