चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । परमहंस संत श्री रणछोड़दास जी महाराज की तपस्थली बड़ीगुफा जानकीकुंड स्थित रघुवीर मन्दिर में गौरी-जया-पार्वती व्रत में 125 कन्याओं ने सहभागिता की। आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी से श्रावण कृष्ण द्वितीया तक पांच दिवसीय व्रत को ट्रस्ट चार दशक से मना रहा है। महिला समिति अध्यक्ष ऊषा जैन ने बताया कि ये व्रत गुजरात में भारी तादाद में मनाया जाता है। चित्रकूट में इस व्रत की शुरुवात स्व अरविन्द भाई मफतलाल व स्व श्रीमती सुशीलाबेन मफतलाल की प्रेरणा से हुई थी।
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| कन्याओं के पैर पूजते ट्रस्टी। |
गुरुवार को उन्होंने बताया कि ये परम्परा आज भी कायम है। इस व्रत की महत्ता बताते हुए त्रेता युग में मां जानकी गौरी पूजन करने जा रही थी, तभी एक सखी ने मां जानकी को बताया कि फुलवारी में दो सुंदर राजकुमार आये हैं। उन्हें देखने की लालसा से मां जानकी फुलवारी पहुंची। भगवान राम पर नजर पड़ते ही मां गौरी पूजन कर प्रार्थना करती है कि भगवान राम ही उन्हें पति रूप में मिले। मां गौरी उन्हें आशीर्वाद देती हैं कि भगवान राम तुम्हे पति रूप में मिलेंगे। तब से ये व्रत अविवाहित कन्यायें करती हैं। इस व्रत से हिंदू सनातन धर्म को आने वाली पीढ़ियां जानेंगी। प्रतिवर्ष इसकी तादाद बढ रही है। व्रत के अन्तिम चरण में माता गौरी-पार्वती की आराधना में रात्रि जागरण व धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। इस वर्ष विद्याधाम सभागार में गुरुभाई-बहनों व सदगुरु परिवार सदस्यों की मौजूदगी में कार्यक्रम हुए। बुधवार को सवेरे पूजन बाद प्रार्थना भवन से रघुवीर मन्दिर तक शोभा यात्रा निकाली। कन्या पूजन व ज्वारा विसर्जन के साथ व्रत की पूर्णाहुति हुई।


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