भूख व प्यास की शिद्दत को बर्दाश्त कर मांगी मगफिरत की दुआ
फतेहपुर, मो. शमशाद । रमजान का रोजा बड़ों के साथ-साथ मासूम बच्चे भी रख रहे हैं। जहां एक ओर सूरज की तपिश से दिन भर गला सूख जाता है, पानी पीने के बाद भी प्यास की शिद्दत बनी रहती है। दूसरी ओर अल्लाह को राजी करने के लिए छोटे बच्चे भी रमजान का रोजा रख रहे हैं। कुछ बच्चों ने अपनी जिंदगी का पहला रोजा रखा। उन्ही में से शहर के न्यू कालोनी ज्वालागंज मुहल्ला निवासी रफीक चश्मे वाले की पौत्री एवं तौसीफ सिद्दीकी की आठ वर्षीय पुत्री इज्मा सिद्दीकी ने अल्लाह और उसके रसूल की रजा हासिल करने के लिए भूख और प्यास की शिद्दत को
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रोजदार इज्मा सिद्दीकी। |
बर्दाश्त कर रोजा रखा और अपने माता-पिता के साथ-साथ परिवार की मगफिरत के अलावा देश में अमन चैन की दुआ मांगी। इलमा रिजवी ने कहा कि रमजान में रोजा रखकर इबादत करने का सवाब बहुत ज्यादा है। इसलिए माह-ए-रमजान की कद्र करती हूं। इस अवसर पर तौसीफ सिद्दीकी की ओर से आवास पर ही रोजा इफ्तार पार्टी का भी आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में रोजदारों ने पहुंचकर निर्धारित समय पर रोजा इफ्तार कर मुल्क में आपसी भाईचारा कायम रहने के साथ ही अमन-चैन की अल्लाह से दुआएं मांगी।
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