महोत्सव के तीसरे दिन दिखा समग्र भारत
नानाजी के सपनों की पाठशाला
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में आयोजित पंच दिवसीय ग्रामोदय महोत्सव के तीसरे दिन विश्वविद्यालय परिसर खेलए संस्कृतिए विचार और बौद्धिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। कुलगुरु प्रो आलोक चौबे ने विभिन्न बौद्धिकए सांस्कृतिकए ललित कला एवं खेल प्रतियोगिताओं का भ्रमण कर प्रतिभागी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया और उन्हें जीवन व राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का संदेश दिया। वाल्मीकि सभागार में आयोजित ग्रामोदय व्याख्यान माला की अध्यक्षता कुलगुरु प्रो आलोक चौबे ने कीए जबकि मुख्य वक्ता अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान के संस्थापक समाजसेवी गया प्रसाद गोपाल रहे। शॉल व पुष्पगुच्छ से अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया गया और उनके दीर्घकालीन सामाजिक व ग्रामीण योगदान पर प्रकाश डाला
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| कार्यक्रम में मौजूद शिक्षकगण |
गया। पूर्व छात्रा संध्या के प्रेरक गीत गाँव बढ़ेगाए देश बढ़ेगा ने सभागार को ग्रामोदय की भावना से भर दिया। मुख्य वक्ता गोपाल भाई ने राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख के साथ कार्य के अनुभव साझा करते हुए ग्रामोदय विश्वविद्यालय की वैचारिक भूमिकाए चेक डैमए बंधुआ मजदूरी उन्मूलनए शिक्षा और स्वावलंबन जैसे प्रयासों का उल्लेख किया। संवाद सत्र में विद्यार्थियों के प्रश्नों के व्यावहारिक उत्तर देकर उन्होंने सेवा को जीवन का संकल्प बताया। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो आलोक चौबे ने कहा कि नानाजी का सपना था कि विकास की रोशनी गांव तक पहुंचेए और ग्रामोदय उसी का जीवंत मॉडल है। खेल परिसर में एथलेटिक्स की फाइनल प्रतियोगिताओं और क्रिकेट मैचों ने रोमांच पैदा कियाए वहीं विवेकानंद सभागार में देशभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां छाईं। कला संकाय भवन में.क्या तकनीक मानव को संवेदनहीन बना रही है. विषय पर वाद.विवाद में विद्यार्थियों की बौद्धिक चमक दिखाई दी। ग्रामोदय महोत्सव का तीसरा दिन समग्र विकास की जीवंत तस्वीर बनकर उभरा।
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