चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि : बाल संरक्षण और निराश्रित बच्चों के पुनर्वासन की दिशा में जिले में एक और दत्तक-ग्रहण प्रक्रिया बुधवार को पूरी हुई। किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015 और दत्तक ग्रहण विनियम 2022 के तहत विशेषीकृत राजकीय दत्तक ग्रहण इकाई (एसएए) के माध्यम से बच्ची को कानूनी रूप से गोद दिए जाने की प्रक्रिया पूरी की गई। यह जिले में इस तरह की तीसरी सफल विधिक प्रक्रिया बताई गई है। जिलाधिकारी पुलकित गर्ग के निर्देशन और जिला प्रोबेशन अधिकारी प्रगति गुप्ता के पर्यवेक्षण में यह प्रक्रिया बुधवार को कलेक्टरेट में पूरी हुई। जिलाधिकारी ने दत्तक माता से आवश्यक पूछताछ के साथ दस्तावेजों का सत्यापन किया। इसके बाद
विधिक आदेश जारी कर बच्ची को उन्हें सुपुर्द किया। उन्होंने बच्ची के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए दत्तक माता को बधाई दी। बताया गया कि दत्तक माता ने वर्ष 2022 में ऑनलाइन पंजीकरण कराया था। करीब चार वर्ष के इंतजार के बाद बच्ची को परिवार का हिस्सा पाकर परिवार में खुशी का माहौल रहा। प्रक्रिया में संरक्षण अधिकारी सौरभ सिंह, कंप्यूटर ऑपरेटर प्रशांत शुक्ला और विशेषीकृत राजकीय दत्तक ग्रहण इकाई के अधीक्षक कमलेश रैक्वार का सहयोग रहा। जिला प्रोबेशन अधिकारी ने बताया कि बच्चा किसी अस्पताल, नर्सिंग होम या सीधे किसी व्यक्ति से लेना गैरकानूनी है। इच्छुक माता-पिता को केवल केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) के आधिकारिक पोर्टल पर पंजीकरण करना चाहिए। लावारिस या छोड़ा गया बच्चा मिलने पर चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या बाल कल्याण समिति को सूचना देनी चाहिए।


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