कथाव्यास ने कंश वध व रुकमणि विवाह की कथा का श्रोताभक्तों को कराया रसपान
बांदा, के एस दुबे । परमात्मा के प्रति सच्ची श्रद्धा और समर्पण की भावना भक्त की निहित है तो प्रभु का सानिध्य भी निश्चित है। भक्त यदि परमात्मा के प्रति निस्वार्थ भाव से पूरी श्रद्धा के साथ समर्पित हो जाए तो उसका कल्याण भी तय है और परमात्मा अपने भक्त को अंगीकार कर लेते हैं। नगर के नरैनी रोड स्थित मां भगवती सदन में चल रही संगीतमयी श्रीमद भागवत कथा के छठवे दिन कथाव्यास आचार्य रजनीश शरण महाराज ने कंस वध व रुकमणि विवाह की कथा का रसपान कराते हुए यह बात कहीं। उन्होंने बताया कि कंश के अत्याचारों से लोग त्राहि-त्राहि कर
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| कथा सुनाते हुए कथा व्यास आचार्य रजनीश शरण महाराज |
रहे थे और संतों पर अत्याचार हो रहे थे। उनके कल्याण के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा पहुंचकर कंश का वध किया। करागार में बंद अपनी माता देवकी व पिता वसुदेव को मुक्त कराया, साथ ही अपने नाना को भी कारागार से मुक्ति प्रदान की। इसी बीच उन्होंने रुकमणि विवाह की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि रुकमणि भगवान श्रीकृष्ण को अपने पति के रूप में स्वीकार कर चुकी थी, लेकिन उसका भाई रुक्मी रुकमणि का विवाह शिशुपाल के साथ कराना चाहता था। इस स्थिति में रुकमणि के सामने गहन संकट छाया हुआ था। इस पर रुकमणि ने अपना
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| राधा-कृष्ण के स्वरूप नृत्य प्रस्तुत करते हुए |
संदेश एक वाहक से भेजकर भगवान श्रीकृष्ण तक पहुंचाया और प्रभु ने तत्काल रुकमणि की फरियाद को अंगीकार करते हुए वहां पहुंचे जिस मंदिर में रुकमणि पूजन के लिए आई हुई थी। उसी दौरान श्रीकृष्ण ने रूकमणि को रथ में बैठाकर वृंदावन ले आए, जहां उन्होंने विधि विधान से उनके साथ विवाह किया। उन्होंने बताया कि रुकमणि साक्षात लक्ष्मी का ही अवतार हैं। इस अवसर पर कथा यजमान अनूप गुप्ता, शोभा गुप्ता, अतुल गुप्ता, अजय, अभय, अंशुल गुप्ता, घनश्याम गुप्ता, रामनरेश, विनय गुप्ता, शाश्वत सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।



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