कामदगिरि से लगाई न्याय की गुहार,
हड़ताल व अराजकताः ग्रामोदय का असली चेहरा ?
नशे में मदहोश प्रशासन, कर्मचारी भूखे मरने को मजबूर
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । चित्रकूट के महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय में अराजकता अपने चरम पर है। जिस विश्वविद्यालय की नींव ग्राम्य विकास व सामाजिक उत्थान के संकल्प के साथ रखी गई थी, वहां आज कर्मचारी अपने हक के लिए 40 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं, लेकिन प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। तीन महीने से वेतन न मिलने की वजह से कर्मचारी कर्ज में डूब चुके हैं, घर चलाना मुश्किल हो गया है, लेकिन प्रशासन पद के गुमान में डूबे हुए हैं। आखिर कब तक कर्मचारी यूं ही भूखे मरेंगे? जब शासन व विश्वविद्यालय प्रशासन से बार-बार गुहार लगाई गई, तब भी किसी ने सुध नहीं ली। हारकर कर्मचारियों ने कामदगिरि के दरबार में न्याय की गुहार लगाई। हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ के जरिए भगवान से प्रार्थना की कि शासन और प्रशासन को सद्बुद्धि मिले। क्या यह वही संस्थान है, जो कभी ग्रामीण विकास व उच्च शिक्षा के मूल्यों की बात करता था? आज
![]() |
कामदगिरी में परिक्रमा लगाते ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कर्मचारी |
उसी संस्थान में भ्रष्टाचार व संवेदनहीनता की दीवारें खड़ी हो चुकी हैं। हद तो तब हो गई जब महिला कर्मचारियों ने महिला दिवस पर भी हड़ताल जारी रखी और होली का त्योहार भी मनाने से इंकार कर दिया, फिर भी प्रशासन की आंखें नहीं खुलीं। जब पत्रकारों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब मांगने की कोशिश की, तो जिम्मेदार अधिकारी फोन तक उठाने को तैयार नहीं था। आखिर इस विश्वविद्यालय में यह तानाशाही कब तक चलेगी? कर्मचारी साफ कह चुके हैं कि वे बिना न्याय पाए पीछे नहीं हटेंगे। सवाल है कि क्या विश्वविद्यालय प्रशासन इस अन्याय को जारी रखेगा या फिर नानाजी देशमुख के ग्राम्य विकास के सपनों को भ्रष्टाचार की आग में झोंक देगा?
No comments:
Post a Comment